- स्वस्ति वाचन के साथ खुले सभा मंडप के रजत पट: जल-पंचामृत अभिषेक के बाद महा निर्वाणी अखाड़े ने चढ़ाई भस्म, गूंजा ‘जय श्री महाकाल’
- महाकाल के पट खुले, भस्म से हुआ दिव्य श्रृंगार: सभा मंडप में स्वस्ति वाचन के बाद घंटी बजाकर ली गई आज्ञा
- तराना में दो दिन हिंसा और तनाव के बाद हालात सामान्य: आगजनी, पथराव और तोड़फोड़ में बसें-कारें जलीं, 19 गिरफ्तार; पुलिस तैनाती जारी
- 77वें गणतंत्र दिवस के लिए उज्जैन तैयार: मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव फहराएंगे तिरंगा, कार्तिक मेला ग्राउंड में पहली बार होगा जिला स्तरीय आयोजन
- महाकाल मंदिर में शनिवार तड़के खुले पट, भस्म आरती में साकार रूप में दिए बाबा ने दर्शन
शिप्रा में मिलने से न कान्ह रोक पाए न गंदे नाले, रामघाट पर फिर ये नजारे
उज्जैन | शिप्रा को शुद्ध रखने और प्रदूषण से बचाने के लिए सरकार ने कान्ह डायवर्सन पर 80 करोड़ रुपए खर्च किए हैं। इसके पहले शहर के गंदे नालों को शिप्रा में मिलने से रोकने पर भी करोड़ों रुपए खर्च किए जा चुके हैं। बावजूद स्थिति जस की तस है। बारिश के दौरान कान्ह का गंदा पानी त्रिवेणी पर शिप्रा में मिल गया, जिससे जलप्रदाय में उपयोग किया जा रहा शिप्रा का पानी भी प्रदूषित हो गया। स्थिति यह बनी कि पीएचई को फिल्टर प्लांट बंद करने पड़े। बाद में नर्मदा का पानी आने पर जलप्रदाय में शिप्रा के पानी का उपयोग शुरू हो पाया। इधर शिप्रा में गंदे नालों की रोकथाम का दावा भी पीएचई करता रहा है। गुरुवार सुबह रामघाट पर सिवरेज लाइन का चैंबर उफना जाने से गंदा पानी घाट से बहता हुआ शिप्रा में मिलता रहा। पहले भी कई बार ऐसी स्थिति बनी। प्रशासन चैंबर की कोई स्थायी व्यवस्था अब तक नहीं कर पाया है।